कहानियां

कहानियां कहानियां कहानियां 

hero-img-bg
ताज़ातरीन कहानी

खुशकिस्मत

पियाली की आंखों में आंसू भर आए थे। बच्चे होते हुए भी एक स्त्री के लिए सबसे बड़ा सुख ,मातृत्व सुख से वंचित पियाली को विमला को विदा करते समय यह समझ में नहीं आ रहा था कि विमला ज्यादा खुशकिस्मत है या वह??बाहर से पतिदेव प्रियेश आवाज दे रहे थे- तुम्हारी पसंद की मछली लाई है। इसे फ्राई कर लो और फटाफट तैयार हो जाओ ।दोस्त राहुल के यहां शादी की वर्षगांठ की पार्टी में जाना है।

पियाली अभी अपने घर की मेन गेट से मेहमानों को विदा कर घर घुसने ही वाली थी कि बगल वाली पड़ोसन ने अपने आंगन से उसके तरफ मुस्कुराते हुए देखा और पूछा -आज छुट्टी है क्या ?? पियाली ने हां में जवाब देते हुए कहा- छुट्टी तो थी लेकिन छुट्टी नहीं थी। अभी तो मेहमानों को विदा किया है। मेहमान नवाजी में छुट्टी छुट्टी कहां रह जाता है?
दो बच्चों कि मां पियाली बैंक में ऑफिसर पद पर नियुक्त है और आसपास के लोग बहुत सम्मान और हसरत से उसकी संपन्नता और आत्मनिर्भरता को देखते हैं, विशेषकर गृहिणियां।
खुद पियाली को बहुत गौरव महसूस होता है। सब कुछ तो है उसके पास, एक समझदार सुलझा हुआ बैंक में ऑफिसर पद वाला पति जो उसके सही निर्णय एवं विचारों को पूरी स्वतंत्रता देता है, दो छोटे-छोटे प्यारे प्यारे बच्चे, दो बड़ा सा घर, एक गृहनगर में जहां सास ससुर बच्चों के साथ रहते हैं और एक यहां जहां पर उसकी पोस्टिंग है ,एक चार पहिया गाड़ी, दो दोपहिया गाड़ी।एक मध्यमवर्गीय स्त्री को और क्या चाहिए??
पड़ोसन ने सामने सड़क पर जाती हुई एक दूसरी महिला को टोका -अभी शाम में कहां से आ रही है विमला जी? पियाली ने सामने देखा एक हमउम्र महिला हाथ में दूध का बर्तन लिए सड़क पर चली जा रही थी। उस महिला यानी विमला ने पियाली को भी नमस्ते किया। पियाली को उनका चेहरा थोड़ा जाना पहचाना लगा। पियाली ने उत्सुकता बस पूछा- जी माफ कीजिएगा, मैंने आपको पहचाना नहीं। विमला जी ने उत्तर दिया -मैं आपके मोहल्ले के बगल वाले मोहल्ले में रहती हूं। यही चौक पर हमारा किराने का भी दुकान है ।आपके पति हमारे पति को पहचानते हैं, मैं तो आपके घर के गृह प्रवेश में भी आई थी। पियाली ने कहा ओ अच्छा अच्छा ,हां इसीलिए चेहरा थोड़ा जाना पहचाना लगा । दरअसल बैंक में एक दिन में सैकड़ों लोगों से मिलना होता है ।उसमें कोई ऐसा चेहरा याद नहीं रह जाता है जिसको सिर्फ दो मिनट के लिए देखा हो।और अभी तो नए नए आए हैं इस मोहल्ले में ।राशन वगैरह तो पति हीं ले आते हैं या ऑनलाइन मंगा लेते हैं,इसीलिए आपको पहचाना नहीं। पड़ोसन अपने घर के अंदर चली गई थी।

विमला ने आगे कहा- उस दिन आपका पूरा घर देख नहीं पाए थे बहुत भीड़ थी ना। पियाली को ना चाहते हुए भी विमला को अपने घर के अंदर चाय नाश्ते के लिए और घर दिखाने के लिए बुलाना ही पड़ा। पियाली को छुट्टी के दिन परिवार और खुद के साथ समय बिताना बड़ा अच्छा लगता था।अपनी पसंदीदा काम जैसे डायरी लिखना, फिल्मे देखना ,सभी शौक वो छुट्टी के दिन पूरा करती थी जो आज पूरी नहीं होने वाली थी।पियाली को बड़ा अच्छा लग रहा था अपना बड़ा सा नया घर, घर की शान ओ शौकत विमला को दिखाते हुए ।विमला की भी आंखें चमक रही थी प्याली की समृद्धि देखकर।
घर के कोने में रखी हुई बच्चों वाली नई साइकिल पर विमला की नजर पड़ी। विमला ने पूछा -यह आपके बेटे की साइकिल है। पियाली ने कहा -हां उसके जन्मदिन पर खरीदी थी। विमला ने रुआंसी होकर कहा-मेरा बेटा सूरज भी बहुत दिनों से साइकिल की मांग कर रहा है लेकिन उसे दे नहीं पा रही हूं। फिर बात को बदलते हुए विमला ने कहा आपकी साड़ी बहुत अच्छी लग रही है कितने की है? पियाली ने नम्रता से कहा 5000 की है ।आज मेहमान आए थे तो पहन लिया था। विमला ने आश्चर्य से कहा 5000 की?? इतनी कीमती साड़ी तो मुझे बस शादी की पहली वर्षगांठ पर मिली थी। इसके बाद तो बस एक सपना रह गया है।
सीधी सरल विमला ने कहा -कितनी खुश किस्मत हैं आप ।नौकरी वाली हैं ,जब मन किया गहने खरीद ली, जब मन किया कपड़े खरीद ली।
फिर उसने पूछा बच्चे ,आपके सास ससुर और पति दिखाई नहीं दे रहे हैं, उस दिन तो सभी थे गृह प्रवेश में? पियाली ने कहा- प्रियेश सभी मेहमानों को स्टेशन छोड़ने गए हैं ,आते ही होंगे। बच्चे और सास-ससुर गृह नगर में है। वहां पर भी अपना घर है ना, तो उसको भी देखना पड़ता है। उस दिन गृह प्रवेश का पूजा था तो सब कोई यहां आए थे । विमला ने आश्चर्य से कहा- तो आप यहां बिना बच्चों के रहती हैं? पियाली ने लंबी आहें भरते हुए कहा -बच्चों को नौकरानी के भरोसे छोड़ने की हिम्मत नहीं है मुझ में, पता नहीं कैसे व्यवहार करेगी मेरे बच्चों के साथ? सासु मां और ससुर जी के पास बच्चे अच्छे से रह लेते हैं और सप्ताहांत में हम दोनों मिल आते हैं।
विमला की आंखें फटी रह गई थी, यह सुनकर। उसके मुंह से निकल गया- हे भगवान कैसे रहती हैं आप बिना बच्चों के?? मैं तो आधे घंटे भी नहीं रह सकती हूं। अभी शाम के समय सभी खेल रहे हैं ।उसमें भी हर आधे घंटे पर देख आती हूं कि ठीक से खेल रहे हैं या नहीं? मैं तो नहीं रह सकती अपने बच्चों के बिना। चाय का कप नीचे रखते हुए विमला उठ खड़ी हुई और बोली -अच्छा ,अब मैं चलती हूं ,बच्चों के शाम के नाश्ते का समय हो गया है।
पियाली ने उन्हें वह साइकिल देते हुए कहा- इसे आप सूरज के लिए मेरी तरफ से गिफ्ट समझकर लेते जाइए ।सूरज चलाएगा इसे तो मैं समझूंगी कि रेहान चला रहा है। वैसे भी रेहान के पास वहां भी एक साइकिल है।
पियाली की आंखों में आंसू भर आए थे। बच्चे होते हुए भी एक स्त्री के लिए सबसे बड़ा सुख ,मातृत्व सुख से वंचित पियाली को विमला को विदा करते समय यह समझ में नहीं आ रहा था कि विमला ज्यादा खुशकिस्मत है या वह??बाहर से पतिदेव प्रियेश आवाज दे रहे थे- तुम्हारी पसंद की मछली लाई है। इसे फ्राई कर लो और फटाफट तैयार हो जाओ ।दोस्त राहुल के यहां शादी की वर्षगांठ की पार्टी में जाना है।

  • Nascetur aenean lorem pretium accumsan

  • Sed ut fames maecenas ullamcorper vestibulum

  • Non duis tristique tortor bibendum

Best selling books

Est proin massa

Ultrices aliquam

Ultrices aliquam

Don't miss it!

Get a special copy signed by me

Duis quis euismod facilisis nunc arcu, diam non aliquet eget imperdiet maecenas blandit vitae laoreet tincidunt sociis proin massa pulvinar.

18 Apr

2021

Location

1234 N Spring St, Los Angeles, CA 90012, United States.

writer-template-book-signing

Get all the latest news and info sent to your inbox.