ताज़ातरीन कविता
कृष्ण स्वपन
तुम इस तरह मेरे सपनों में आती हो
अपनी गुलाबी मुस्कान बिखराती हो
कि मुझे लगता ही नहीं
महीनों हो गए हमें बिछड़े हुए ।
मैं तुम्हें अपनी नैनों में भरता हूं
तुम्हारी यादों में डूबा धीरे से कहता हूं
क्या रहते हैं तुम्हारे घुंघराले बाल
अभी भी गालों पर बिखरे हुए।
ताज़ातरीन कहानी
खुशकिस्मत
खुद पियाली को बहुत गौरव महसूस होता है। सब कुछ तो है उसके पास, एक समझदार सुलझा हुआ बैंक में ऑफिसर पद वाला पति जो उसके सही निर्णय एवं विचारों को पूरी स्वतंत्रता देता है, दो छोटे-छोटे प्यारे प्यारे बच्चे, दो बड़ा सा घर, एक गृहनगर में जहां सास ससुर बच्चों के साथ रहते हैं
पियाली अभी अपने घर की मेन गेट से मेहमानों को विदा कर घर घुसने ही वाली थी कि बगल वाली पड़ोसन ने अपने आंगन से उसके तरफ मुस्कुराते हुए देखा और पूछा -आज छुट्टी है क्या ?? पियाली ने हां में जवाब देते हुए कहा- छुट्टी तो थी लेकिन छुट्टी नहीं थी। अभी तो मेहमानों को विदा किया है। मेहमान नवाजी में छुट्टी छुट्टी कहां रह जाता है?
दो बच्चों कि मां पियाली बैंक में ऑफिसर पद पर नियुक्त है और आसपास के लोग बहुत सम्मान और हसरत से उसकी संपन्नता और आत्मनिर्भरता को देखते हैं, विशेषकर गृहिणियां।
खुद पियाली को बहुत गौरव महसूस होता है। सब कुछ तो है उसके पास, एक समझदार सुलझा हुआ बैंक में ऑफिसर पद वाला पति जो उसके सही निर्णय एवं विचारों को पूरी स्वतंत्रता देता है, दो छोटे-छोटे प्यारे प्यारे बच्चे, दो बड़ा सा घर, एक गृहनगर में जहां सास ससुर बच्चों के साथ रहते हैं और एक यहां जहां पर उ
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