द्रौपदी चीरहरण

द्रौपदी चीरहरण

गौरवशाली इतिहास का वर्तमान
था आज लहूलुहान खड़ा
महारथियों से भरी सभा में
क्षत्रिय धर्म था निष्प्राण पड़ा ।

द्रौपदी चीरहरण

साभार रंजना

पूछी हे काका विदुर, हे नीतिशास्त्री
आपकी नीति इस विषय में क्या कहती है?
क्या वो भी भीष्म पितामह समान
कुलवधु के अपमान पर चुप रहती है?

हे धर्मात्मा इस पापी वृक्ष तले
यूं चुप बैठे रहने का औचित्य क्या है ?
आपके सामने नीति उल्लंघन अनीति नहीं
तो आज का कड़वा सत्य क्या है ?

हे सत्यवादी, हे स्पष्ट वादी
हे सर्वदा बोलने वाले सत्य बोल।
हे काका विदुर,आप मुझे बताइए
क्या है पति के लिए पत्नी का मोल?

क्या एक पत्नी पर संपत्ति रूप में
पति का है सर्वाधिकार सिद्ध?
हे नीति ज्ञाता आप तो चुप ना रहे
अपने ज्ञान के लिए तो आप हैं प्रसिद्ध।

अपमान की अग्नि में जलती
द्रौपदी आज थी बहुत हताश ।
धर्म अधर्म के प्रश्न पर
ज्ञान ने भी किया था निराश।

(मौन धर्मात्मा विदुर का ह्रदय
आज अत्यंत व्यथित था ।
सोचते कैसा लज्जाजनक वर्तमान यह
जिसका कभी स्वर्णिम अतीत था ।)

संगीता

साभार साई सात्विक

Featured Post

Duis sed consectetur dui quaerat consectetur nulla nec corrupti lacus.

दिल से

Nequ

मेरी दीदी को समर्पित
उनके अथक प्रोत्साहन हेतु

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *