बिगड़ जाऊ

बिगड़ जाऊ


मुझे इतना कम भी मत चाहो
कि मैं बिखर जाऊं

बिगड़ जाऊ

साभार रंजना

मुझे इतना अधिक मत चाहो
कि मैं बिगड़ जाऊ


मुझे इतना कम भी मत चाहो
कि मैं बिखर जाऊं


मुझे बस इतना चाहो
कि मैं तुम सा संवर जाऊं


हमारे प्यार में तुम सूरज
और मैं चांद सा निखर जाऊं

कभी दूर ना जाऊं तुमसे
बस तुममें ही ठहर जाऊं

replied


मैं भी चाहूं तुझे चारों पहर
इसके इतर ना कोई बसर चाहूं।


मेरी सुबह तुम से ही हो शुरू
तुझ पर ही पड़े पहली वह नजर चाहूं


सोते हुए सपनों में भी तू ही आए
ख्वाबों का वह जीता जागता शहर चाहूं


लब खुले तो तेरा नाम लेकर
संगीत के प्रवाह का मद्धम सा लहर चाहूं


जब अनजानी राह पर निकल जाऊं
तो बस तुम ही तुम हो हमसफर चाहूं


गर हो जाओ ओझल नजरों
तुझे ढूंढने में मैं न कहीं ठहर जाऊं

संगीता

साभार रंजना

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