Month: July 2021

द्रौपदी चीरहरण

द्रौपदी चीरहरण कभी नैतिकता की मूर्ति भारतवर्ष मेंयह था अनैतिकता का चरमोत्कर्ष।की केशो तक जा पहुंचे थे हाथजिनको करना था चरणस्पर्श। गौरवशाली इतिहास का वर्तमानथा आज लहूलुहान खड़ामहारथियों से भरी सभा मेंक्षत्रिय धर्म था निष्प्राण पड़ा । नीति निस्तेज, ज्ञान था मौनधर्म भी हो उठा था लज्जित।जब कुलवधू वस्त्रहरण संगकुल मर्यादा हुई थी कलंकित? वास्तव …

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तू चांद बनी रहे

तू चांद बनी रहे तू चांद बनी रहे ,तुझे घेरे रहे लाखों तारे । बाग की हर फूल और कलियां,जीवन तेरा संवारे। जिंदगी में कभी भी तू,किसी मुश्किल से ना हारे। हर खुशी दस्तक दे,दिन रात तेरे ही द्वारे। तू साथ कभी ना छोड़ना,हम जीते हैं तेरे सहारे। तेरी एक आवाज पर हम,अपनी जान तक …

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नीम का पेड़

नीम का पेड़ मेरे मोहल्ले में अधिक नहीं ,तो पढ़े-लिखे कम भी नहीं है। पर उन्हें पर्यावरण का गम ही नहीं है । मेरे घर के पास ही एकजानवरों के डॉक्टर ने घर बनवाया। घर बनवाते ही पास ही खड़े,हरे भरे नीम को कटवाया। मेरी समझ में यह नहीं आता है , यह डॉक्टर जानवरों …

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आसरा

आसरा न जाने इस बुढ़िया को यह किस रोग ने यूं जकड़ा है बैठी रहती है चौखट पर ,बेटे की आस मेंवही जो उसके ह्रदय काएकमात्र टुकड़ा है गया था जो शहर,लौट कर आने का वायदा करकेउसे क्या पता थाजीवन का रास्ता बड़ा संकरा है बढ़ चुका नशे की राह में,कमाता कम गंवाता अधिक क्योंकि …

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सितम

सितम उनके आने कि खुशीउनके जाने का गमऐ जिन्दगी तेरा बहुत है सितम मेरे नखरे घटेहो उनके तेवर खतमऐ जिंदगी तेरा बहुत है सितम मैं रहूं मीठीमा हो उनके मिज़ाज गरमऐ उनके आने कि खुशीउनके जाने का गमऐ जिन्दगी तेरा बहुत है सितम हम सदा पास रहेहो दूरियां न्यूनतमऐ उनके आने कि खुशीउनके जाने का …

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बिगड़ जाऊ

बिगड़ जाऊ मुझे इतना अधिक मत चाहोकि मैं बिगड़ जाऊ मुझे इतना कम भी मत चाहोकि मैं बिखर जाऊं मुझे बस इतना चाहोकि मैं तुम सा संवर जाऊं हमारे प्यार में तुम सूरजऔर मैं चांद सा निखर जाऊं कभी दूर ना जाऊं तुमसेबस तुममें ही ठहर जाऊं replied मैं भी चाहूं तुझे चारों पहरइसके इतर …

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shadi ke side effect

marriage ke side effect हम वर्किंग मैरिड women kaKuchh alag hi dukh bhara फसाना हैऑफिस से जल्दी जाने पर बॉसऔर घर लेट आने पर सास मारती ताना है बॉस हमारी ऑफिस केऔर घर में सासू मा एक से ही होते हैंकितने भी कम कर दोहमेशा कामका दुखड़ा ही रोते हैं ऑफिस में बॉस कोस्मार्ट वर्किंग …

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हॉस्टल के दिन

हॉस्टल के दिन शाखों से जैसे पत्ते हैं गिरतेजिस तरह हैं मौसम बदलतेकुछ इस तरह हम जिंदगी जिया करतेथोड़ा सा डूबते थोड़ा सा उभरते समस्याओं से हम हर रोज हैं घिरतेफिर भी मुश्किलों को पीछे हैं ठेलतेकुछ इस तरह हम जिंदगी जिया करतेथोड़ा सा डूबते थोड़ा सा उभरते मन की नाकामियों से हर दिन हैं …

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महामारी और मेरा तबादला

महामारी और मेरा तबादला मुझे नहीं पता मेरी नौकरीमेरा शौक है या सपनालेकिन मैंने ऐसा कभी नहीं चाहाकि पास ना हो कोई मेरा अपना मेरा तो बस सपना था किमैं सिर्फ एक गृहिणी बनकर जीऊंपति ,परिवार ,पैसे के साथजिंदगी के सुख का हर रस पिऊं लेकिन इस नौकरी की बदौलतमैंने ढेरों सुख भी पाया हैबच्चे …

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विदाई

विदाई नारायण बाबू अपनी सरकारी ऑफिस के कुछ गिने-चुने ईमानदार व्यक्तियों में से एक थे। नारायण बाबू का ऑफिस सरकारी विभागों में सबसे भ्रष्ट विभागों में से एक था। नारायण बाबू को ना जाने कितनी बार दूसरी कमाई के अवसर मिले लेकिन नारायण बाबू अपने ईमान एवं अच्छे संस्कार के पक्के थे ।उन्होंने अपने आत्मविश्वास …

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